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गणगौर 2019 व्रत कथा शायरी फेस्टिवल जानकारी पूजा विधि दोहे विशेस गीत | Gangaur Pooja Vidhi Katha Shayari Details Dohe Song History in Hindi

गणगौर 2019 व्रत कथा शायरी फेस्टिवल जानकारी पूजा विधि दोहे विशेस गीत | Gangaur Pooja Vidhi Katha Shayari Details Dohe Song History in Hindi: सभी मित्रों को गणगौर 2019 फेस्टिवल की हार्दिक बधाई. यह राजस्थान तथा आसपास के राज्यों में मनाया जाने वाला सुहाग का महापर्व हैं. gangaur festival date 2019 वर्ष 2019 में यह व्रत २१ मार्च से ८ अप्रैल तक मनाया जाना हैं. यहाँ आज हम Gangaur in Hindi में इस पर्व के बारें में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेगे.

गणगौर 2019 व्रत कथा शायरी फेस्टिवल जानकारी पूजा विधि दोहे विशेस गीत 

Gangaur Pooja Vidhi Katha Shayari Details Dohe Song History in Hindi

गणगौर का इतिहास (gangaur festival history in hindi) 

देश के दो मुख्य उत्तरी राज्य राजस्थान व मध्यप्रदेश में गणगौर को एक बड़े उत्सव की तरह मनाया जाता हैं. चैत्र माह की शुक्ल तीज के दिन गणगौर मनाया जाता हैं. मान्यता हैं कि इस दिन इसर / शिवजी तथा गौरा अर्थात पार्वती देवी की पूजा की जाती हैं. सुहागन बहिनें अपने अखंड सौभाग्य के वरदान के लिए तथा अविवाहित बहिने योग्य वर के लिए गणगौर का व्रत रखती हैं. इस दिन पूजा में हाथ में दूब की घास के साथ गोर गोर गोमती के गीत गायें जाते हैं. 

गणगौर पर्व का महत्व (gangaur festival details)

राजस्थान के मुख्य पर्वों में गणगौर की गिनती की जाती हैं. यह आस्था प्रेम और पारिवारिक सौहार्द का बड़ा त्यौहार हैं. विवाहित महिलायें चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर पूजन तथा व्रत कर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य वर से विवाह का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं.

यह पर्व १८ दिनों तक चलता हैं होली के अगले दिन यानी चैत्र कृष्ण एकम तिथि से आरम्भ होकर चैत्र शुक्ल तृतीया तक चलता हैं. इसे मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं ऐसी मान्यता हैं कि होलिका दहन के बाद पार्वती अपने पीहर चली जाती हैं तथा १८ दिन रहने के बाद तृतीया के दिन भगवान् शंकर उन्हें लेने के लिए आते हैं. 

गणगौर की व्रत कथा (gangaur katha in hindi & gangaur vrat katha)

प्राचीन समय की बात हैं एक बार नारद के साथ शिव पार्वती पृथ्वी लोक में घूमने के लिए निकले. चैत्र शुक्ल तीज के दिन घुमते घूमते वे एक गाँव पहुचे.

शिव पार्वती के आने की खबर सुनकर उस गाँव वालों में अति प्रसन्नता का भाव था. गाँव के ऊँचे घराने की औरते उनके भोजन की तैयारी में लग गयी. निम्न परिवार की स्त्रियों चावल और अक्षत लेकर शिव पार्वती की पूजा की. पार्वती उनकी श्रद्धा से प्रसन्न हुई तथा उन्होंने सम्पूर्ण सुहाग रस उन्हें दे दिया.

अब गाँव के उच्च परिवार की महिलाएं स्वर्ण जड़ित थाल में शिव पार्वती के खाने के लिए पकवान तैयार कर लाई. इन्हें देख शिवजी को शंका हुई तो उन्होंने गौरी से कहा आपने सारा सुहाग उन्हें दे दिया अब आप इन्हें क्या दोगी.

पार्वती भोलेनाथ से कहने लगी आप व्यर्थ की चिंता ना करे उन्हें उपरी रस दिया हैं तथा इन्हें अपनी अंगुली के रक्त का सुहाग दूंगी जो मेरे भाग्य की तरह इन्हें भी सौभाग्यवती बनाएगा.

जब स्त्रियों ने पूजन किया तो पार्वती जी ने उस पर रक्त का छीटा छिडककर सौभाग्य का आशीर्वाद दिया. इसके बाद वे नदी पर गयी तथा स्नानादि करने के बाद बालू की शिव पार्वती की मूर्ति बनाकर उनको भोजन कराने लगे.
गणगौर मेहँदी फोटो (gangour mehandi photo)
गणगौर के गीत (gangaur geet rajasthani songs / gangour song in hindi)


गणगौर की विशेस शायरी (gangaur hindi shayari | gangaur shayari in hindi)
गणगौर का है बहुत ही मधुर प्यार का
दिल की श्रद्धा और सच्चे विश्वास का
बिछियां पैरों में हो माथे पर बिंदिया
हर जन्म में मिलन हो हमारा पिया
गणगौर की घणी घणी बधाई
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चंदन की खुशबू, फागुन की बहार
आप सभी को गणगौर की बधाई
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आया रे आया गणगौर का त्यौहार है आया
संग में खुशियां और प्यार है लाया
गणगौर पर्व की आपकों बधाई 
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माँ पार्वती आप पर अपनी कृपा हमेशा बनाए रखे
आपको गणगौर पर्व की बधाई
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गणगौर है उमंगो का त्यौहार
फूल खिले है बागों में फागुन की है फुहार
दिल से आप सब को हो मुबारक
प्यारा ये शिव गौरी का पर्व  gangaur festival wishes
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गणगौर की पूजा विधि (gangaur puja vidhi in hindu)

गणगौर के दिन यदि विवाहित और अविवाहित कन्याओं द्वारा पूर्ण श्रद्धा तथा भक्ति के साथ व्रत रखा जाए तो उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं. चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन गणगौर का व्रत किया जाता हैं. इस दिन साधक कथा का वाचन, गीत, नृत्य, मेहँदी एवं सोलह श्रृंगार के साथ इस व्रत को रखती हैं.

यह व्रत करने के लिए कृष्ण पक्ष की एकादशी यानि की पापमोचिनी एकादशी को काष्ट की टोकरी में ज्वार भिगोए जाते हैं. साधक को एकादशी से शुक्ल तीज तक दिन में एक समय भोजन करते हुए व्रत रखा जाता हैं. उन्ही भीगे हुए ज्वारों के साथ शिव पार्वती जी की पूजा की जाती हैं. शिव पार्वती की मूर्ति के विसर्जन के दिन तक उनका पूजन होता हैं.


सुहाग के समस्त चिह्नों को पार्वती जी को अर्पित किये जाते हैं. शिव पार्वती पूजन तथा गणगौर की कथा सुनने के बाद सिंदूर से अपनी मांग भर शिव पार्वती से लम्बे सुहाग की कामना करनी चाहिए. वहीँ कुवारी कन्याओं द्वारा गौरी माता का वर प्राप्ति का आशीर्वाद लिया जाता हैं. शिव गौरी पूजन के बाद उन्हें जल स्रोत से स्नान कराने के बाद गाजे बाजे के साथ उनकी शोभायात्रा निकालकर विसर्जन किया जाता है.

गणगौर दोहा (gangaur festival dohe in hindi gangaur ke dohe hindi lyrics )
गौर गौर गणपति, ईसर पूजे पार्वती,
पार्वती के आला टिका, गौर के सोने का टिका, 
माथे है रोली का टिका,
टिका दे चमका दे राजा राजना वरत करे।
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हल्दी गांठ गठीली ईसर राज की
ब्रह्मदास की बहू है हठीली,
मांगी सोना री बिंदी, बिंदी बेच घड़ाई बई पारो झमकाई।
प्रिय मित्रों आप सभी को इस पर्व की ढेर सारी शुभकामनाएं. आज हमने Gangaur Pooja Vidhi Katha Shayari Details Dohe Song History in Hindi के इस आर्टिकल में गणगौर 2019 व्रत कथा शायरी फेस्टिवल जानकारी पूजा विधि दोहे विशेस गीत आदि शेयर किये हैं. यदि आपकों हमारा यह लेख पसंद आया हो तो प्लीज इसे अपने दोस्तों के साथ भी जरुर शेयर करे.
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