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मानव श्वसन तंत्र की सामान्य जानकारी | swasan tantra in hindi

मानव श्वसन तंत्र की सामान्य जानकारी | swasan tantra in hindi: यह सजीवों की परिहार्य प्रक्रिया हैं जिसके द्वारा उनका जीवन बना रहता हैं. swasan tantra क्या है यह कैसे काम करता हैं. एक्कोशिक एवं बहुकोशिकीय जीवों में श्वसन की क्रिया कैसे होती हैं. इसकी जानकारी जीव विज्ञान के इस अध्याय में हम बात करने वाले हैं.

श्वसन तन्त्र क्या हैं What Is swasan tantra in hindi
respiratory system in hindi pdfसभी जन्तु वनस्पतियों पेड़ पौधों दोनों ही श्वसन क्रिया में ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं तथा कार्बन डाई ऑक्साइड त्यागते हैं. श्वसन वायवीय ( Respiratory pneumatic) तथा अवायवीय (Anaerobic) हो सकता हैं.
वायवीय श्वसन वायु की उपस्थिति में होता हैं जबकि अवायवीय श्वसन वायु की अनुपस्थिति में होता है जिसमें ग्लूकोज के अपूर्ण ऑक्सीकरण से एथिल एल्कोहल या लेक्टिक अम्ल बनता हैं. वायवीय श्वसन अधिकांश बहुकोशीय जन्तुओं व मनुष्यों तथा अवायवीय श्वसन जीवाणु, यीस्ट, परजीवी आदि में होता हैं.
  • श्वसन अंग- मछली में गलफड़े तथा मेढ़क, सांप, पक्षी एवं मनुष्य में दो फेफड़े से श्वसन होता हैं. कीट में श्वसन नलियाँ ट्रेकियाँ होती हैं. निम्न श्रेणी के जीव अमीबा , हाइड्रा आदि में कोई श्वसन अंग नही होता हैं. इसकी प्लाज्मा झिल्ली ही विसरण द्वारा यह कार्य करती हैं. केचुएँ में त्वचा द्वारा श्वसन होता हैं. 
  • मनुष्य में स्वरयंत्र (pharynx) होता हैं. इसमें दो जोड़ी स्वर तन्तु (vocal chords) होते हैं. नर में इन तन्तुओं की लम्बाई 2.3 सेमी तथा स्त्री में 1.7 सेमी होती हैं.
  • मनुष्य में श्वसन दर 12 से 18 प्रति मिनट होती हैं. सोते समय यह दर 10 बार प्रति मिनट हो जाती हैं. तथा जन्म के समय शिशु की दर 35 प्रति मिनट होती हैं. 
मित्रों swasan tantra in hindi में आपकों मानव श्वसन तंत्र की सामान्य जानकारी का यह लेख कैसा लगा कमेंट कर जरुर बताएं, यदि आपकों हमारे द्वारा दी गई जानकारी अच्छी लगी हो तो प्लीज इसे सोशल मिडिया पर जरुर शेयर करे.

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